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2027 से पहले आरक्षण लागू नहीं हुआ तो BJP को वोट नहीं दें, बरेली में गरजे मुकेश सहनी : First Bihar Jharkhand

2027 से पहले आरक्षण लागू नहीं हुआ तो BJP को वोट नहीं दें, बरेली में गरजे मुकेश सहनी : First Bihar Jharkhand
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी उत्तर प्रदेश में चल रही निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा के क्रम में बरेली पहुंचे। बरेली पहुंचने पर उनका कार्यकर्ताओं, समर्थकों और निषाद समाज के लोगों ने जोरदार स्वागत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में निषाद, कश्यप और मल्लाह समाज के लोग जुटे। ‎सहनी के पहुंचने के बाद लोगों ने उनके समर्थन में नारे लगाए और आरक्षण की मांग को लेकर अपनी एकजुटता दिखाई। कार्यक्रम के दौरान सहनी ने लोगों से अपने अधिकार और आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया। ‎कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुकेश सहनी ने कहा कि वह उत्तर प्रदेश में किसी से वोट या चंदा मांगने नहीं आए हैं, बल्कि अपने समाज के भाई और बेटे के रूप में लोगों को उनके अधिकार के प्रति जागरूक करने आए हैं। उन्होंने अपने संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके दादा और पिता मछली पकड़ने का काम करते थे। परिवार ने बेहद गरीबी देखी है। 18 वर्ष की उम्र में वह मुंबई गए, जहां मजदूरी और नौकरी से अपने जीवन की शुरुआत की। मेहनत और संघर्ष के बल पर सफलता हासिल की, लेकिन जब बिहार लौटे तो देखा कि समाज के बहुत से लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इसके बाद उन्होंने अपना सुख-सुविधाओं वाला जीवन छोड़कर समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष का रास्ता चुना। ‎सहनी ने कहा कि आज देश चांद पर घर बनाने की बात कर रहा है, लेकिन निषाद, मल्लाह और कश्यप समाज के अनेक परिवारों के पास आज भी अपना पक्का घर और घर तक पहुंचने का रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि वह पिछले 13 वर्षों से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक सहित देश के विभिन्न हिस्सों में समाज को जागरूक करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से कहा कि गरीब परिवार में जन्म लेना कमजोरी नहीं है और संघर्ष के दम पर परिस्थितियों को बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने संविधान के माध्यम से हर नागरिक को वोट की ताकत दी है। लोकतंत्र में गरीब और अमीर के वोट की ताकत समान है। उन्होंने निषाद, कश्यप और मल्लाह समाज से अपनी इस ताकत को पहचानने और अपने बच्चों के भविष्य के लिए उसका इस्तेमाल करने की अपील की। ‎‎सहनी ने आरक्षण के मुद्दे पर कहा कि दिल्ली और पश्चिम बंगाल सहित अलग-अलग राज्यों में संबंधित समुदायों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश में निषाद समाज लंबे समय से अपने अधिकार की मांग कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक देश और एक संविधान होने के बावजूद अलग-अलग राज्यों में आरक्षण की स्थिति अलग क्यों है, इसका जवाब सरकारों को देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि आरक्षण कोई भीख नहीं, बल्कि समाज का अधिकार है। ‎कार्यक्रम के अंत में सहनी ने बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों से हाथ में गंगाजल लेकर संकल्प लेने की अपील की। लोगों ने गंगाजल को हाथ में लेकर 2027 से पहले निषाद समाज को आरक्षण दिलाने के लिए संघर्ष करने का संकल्प लिया। सहनी ने कहा कि इस अभियान को बरेली समेत पूरे उत्तर प्रदेश के गांव-गांव तक पहुंचाया जाएगा। अक्टूबर और नवंबर में विशेष जनजागरण अभियान चलाने की बात कहते हुए उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को अपने बच्चों को पढ़ाने, संगठित करने और अपने अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाने की जरूरत है। ‎‎सहनी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि निषाद, कश्यप और मल्लाह समाज के लिए आरक्षण लागू नहीं किया गया तो समाज को अपने वोट के बारे में विचार करना होगा। उन्होंने कहा कि वे किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत विरोध में नहीं हैं, बल्कि अपने समाज के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से कहा कि अपने वोट को किसी के दबाव, लालच या भावनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य और अधिकारों को ध्यान में रखकर इस्तेमाल करें। ‎‎उन्होंने कहा कि यदि समाज एकजुट होकर अपने अधिकार के लिए आवाज उठाएगा तो सरकारों को उसकी बात सुननी पड़ेगी। सहनी ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सम्मान, शिक्षा और अधिकार की लड़ाई है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि गंगाजल को साक्षी मानकर लिया गया संकल्प केवल कार्यक्रम तक सीमित न रहे, बल्कि इसे गांव-गांव तक पहुंचाया जाए।

Source: https://firstbihar.com/politics/mukesh-sahani-nishad-reservation-bareilly-2027-bjp-vote-256062