एकता, आरक्षण और स्वाभिमान का ऐतिहासिक राष्ट्रीय आंदोलन
निषाद समाज के समग्र उत्थान और संवैधानिक अधिकारों की प्राप्ति हेतु यह अभियान समर्पित है।
अनुच्छेद 341 के तहत मझवार/निषाद समाज की सभी समानार्थी जातियों को अनुसूचित जाति (SC) में आरक्षण दिलाना।
समाज के युवाओं के लिए उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग और छात्रवृत्ति की सुलभ व्यवस्था।
नदियों, तालाबों, मत्स्य पालन और नौकायन के पारंपरिक अधिकारों को स्थानीय मछुआरा समाज को दिलाना।
जनसंख्या के अनुपात में शासन, प्रशासन और नीति-निर्माण में समाज की गरिमापूर्ण भागीदारी।
गांव-गांव में चौपाल, युवा संवाद और सामाजिक चेतना के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को जागरूक और संगठित करना।
ग्राम पंचायत व ब्लॉक स्तर पर समर्पित कार्यकर्ताओं की सक्रिय संकल्प समितियां।
न्यायालयों, आयोगों और शासन स्तर पर आरक्षण के पक्ष में मजबूत विधिक पैरवी।
माताओं और बहनों को जन-जागरण और सामाजिक नेतृत्व में आगे बढ़ाना।
आधुनिक तकनीक, स्वरोजगार और शिक्षा के माध्यम से युवाओं का मार्गदर्शन।
हमारा विजन निषाद समाज को संगठित, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना है।
समाज के प्रत्येक युवा को आधुनिक शिक्षा और रोजगारोन्मुखी तकनीकी प्रशिक्षण।
पंचायतों से लेकर संसद तक समाज के शिक्षित और समर्पित युवाओं का नेतृत्व।
मछुआरों व पारंपरिक कारीगरों के लिए मत्स्य पालन सहकारिता और आधुनिक सुविधाएं।
पारस्परिक सहयोग, एकता और सामाजिक कुरीतियों का उन्मूलन।
भगवान निषादराज गुह्य की ऐतिहासिक विरासत और आजादी के बाद की प्रशासनिक विसंगतियों के समाधान हेतु यह आंदोलन शुरू हुआ।
जल-सभ्यता, नौवहन और प्रभु श्री राम की पावन मैत्री का स्वर्णिम इतिहास।
देश की आजादी के लिए जल-मार्गों पर संघर्ष और वीरों का योगदान।
विभिन्न राज्यों में अलग-अलग श्रेणियों में बांटने से उत्पन्न विसंगतियां।
संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी एकजुटता।
संविधान (अनुसूचित जातियां) आदेश 1950 में मझवार क्रमांक 53 पर SC श्रेणी में सूचीबद्ध है। मल्लाह, केवट, बिंद, कश्यप आदि इसकी समानार्थी उपजातियां हैं जिन्हें शासनादेश जारी कर अधिकार मिलना चाहिए।
मझवार की समानार्थी सभी 18 उपजातियों को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र निर्गत किया जाए।
नदियों में बालू खनन और मत्स्य पालन का प्राथमिकता पट्टा स्थानीय मछुआरा समितियों को मिले।
पारंपरिक नाव, मोटर, आधुनिक उपकरण व मत्स्य व्यापार हेतु ब्याज-मुक्त ऋण व सहयोग।
जन-संवाद, चौपाल और जन-जागरण के निरंतर प्रयास।
अभियान के तहत हर जिले और गांव में चौपालों का आयोजन कर संवैधानिक अधिकारों की जानकारी दी जा रही है।
हर गांव में स्थानीय समस्याओं और आरक्षण पर सार्थक चर्चा।
आरक्षण के समर्थन में एकजुटता का हस्ताक्षर पत्र।
छात्रों एवं युवाओं के भविष्य निर्माण हेतु निरंतर मार्गदर्शन।
गांव-गांव में हस्ताक्षर अभियान और जागरूकता।
शिक्षा, स्वाभिमान और अखंड एकता ही समाज के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।