सीएम योगी के गढ़ में मुकेश साहनी का आरक्षण दांव, 'निषाद' वोटों के सहारे यूपी चुनाव में उतरने की तैयारी : Navbharat Times
वीआईपी के नायक मुकेश साहनी ने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने निशाने पर लिया है। वीआईपी के नायक मुकेश साहनी ने पार्टी विस्तार की नीति को ध्यान में रख कर उत्तरप्रदेश को वीआईपी का गढ़ के रूप में देखना शुरू कर दिया है।
अपने इस संकल्प का पहला अध्याय उत्तरप्रदेश में निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा के साथ शुरू करने वाले हैं। क्या है मुकेश साहनी की व्यूह रचना और कौन सा क्षेत्र है उनके निशाने पर जानते हैं।
कौन क्षेत्र हैं निशाने पर
वीआईपी ने पार्टी विस्तार को ले कर पूर्वी यूपी के क्षेत्रों को निषाद की राजनीति को देखते काफी उर्वर माना है। उनके निशाने पर गंगा-यमुना नदी बेसिन वाले क्षेत्र हैं। निषाद समुदाय के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्रों का आकलन करे यू पी के गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, मिर्जापुर, संत कबीर नगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया और सुल्तानपुर जिले में विशेष प्रभाव है। ऐसा माना जाता है कि इन जिला के लगभग 50 विधानसभा क्षेत्र ऐसे हैं जहां हार जीत के फैसले में निषाद का बड़ा योगदान रहता है।
क्या हैं मुद्दे-
आरक्षण: निषाद को अनुसूचित जाति का लाभ दिलाना इनका प्रमुख मुद्दा है। आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से यह जाति इतनी पिछड़ी हुई है कि अतिपिछड़ा वर्ग में निषाद को रखना उचित नहीं है। बंगाल और उड़ीसा में निषाद अनुसूचित जाति में हैं।
नदी और उसके घाट: वी आई पी की यह मांग काफी दिनों से है कि नदी और घाट की पूरी व्यवस्था निषाद जाति को सौंपी
रेत खनन: वी आई पी की तीसरी मांग रेत खनन पर पूर्णरूपेण पारंपरिक अधिकार चाहते हैं।
पहले भी लड़े चुनाव
वर्ष 2022 उत्तरप्रदेश विधानसभा के चुनाव में वीआईपी ने अपना किस्मत आजमाया था। हालांकि पहले तो मुकेश साहनी ने काफी भौकाल खड़ा करते कहा था कि यूपी की सभी 403 सीटों पर वी आई पी उम्मीदवार देगी। लखनऊ में कार्यालय भी खोल दी। पर बाद में विकासशील इंसान पार्टी ने उत्तर प्रदेश (UP) में पार्टी ने 50 से कुछ अधिक उम्मीदवार मैदान में उतारे थे, लेकिन उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिली और उनकी पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी।