रिजर्वेशन का 'हथियार' लेकर यूपी चुनाव में किस्मत आजमाएंगे मुकेश! निकालेंगे निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा : Navbharat Times
बिहार की राजनीति में इन दिनों असफल योद्धा बने वीआईपी नेता मुकेश साहनी अब यूपी के विधानसभा चुनाव में हार की मानसिक स्थिति से उबरने की तैयारी में जुट गए हैं। दरअसल, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में कुछ बेहतर उम्मीद के साथ उतरे मुकेश साहनी को काफी सेटबैक लगा था। मुकेश सहनी के नेतृत्व वाली विकासशील इंसान पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। स्थिति ये रही कि 15 विधानसभा क्षेत्रों से खम ठोकने वाली वीआईपी (विकासशील इंसान पार्टी) को एक भी सीट नहीं मिल पाई। इस घोर निराशा को आशा में बदलने मुकेश साहनी अब यूपी चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने जा रहे हैं।
यूपी चुनाव मुकेश लिए अहम क्यों?
दरअसल, यूपी की राजनीति में मुकेश सहनी उतरने का मन इसलिए कर रहे हैं कि यहां निषाद वोटरों की जनसंख्या अच्छी है। मिली जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में निषाद और इनके समक्ष जातियां लगभग 5 प्रतिशत हैं। इन पांच प्रतिशत में निषाद में मल्लाह, कश्यप, बिंद, धीवर सहित कुछ छोटी-छोटी अन्य जातियां भी हैं। हालांकि, राजनीतिक पार्टियां इनकी जनसंख्या राज्य की कुल आबादी का लगभग 18% तक होने का दावा करती हैं। इस दावे के साथ निषाद नेता कुछ उपजातियां को शामिल कर चुनाव को प्रभावित करती हैं।
मुकेश सहनी की क्या है रणनीति?
दरअसल, वीआईपी नेता मुकेश साहनी यूपी के चुनाव में आरक्षण का हथियार के कर उतरना चाहते हैं। सामाजिक न्याय की लड़ाई में मुकेश सहनी निषाद को अति पिछड़ा से निकलकर अनुसूचित जाति में लाने की वकालत करते हैं। मुकेश सहनी निषाद (मल्लाह) समुदाय को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा दिलाने के पीछे उनका तर्क भी है। उनका मानना है कि निषाद, बिंद, मल्लाह, बेलदार और नोनिया जैसी अति पिछड़ी जातियों की स्थिति आज भी सामाजिक और आर्थिक रूप से काफी पिछड़ी हुई है। आरक्षण मिलने से समुदाय के लोगों को बेहतर शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।
अगर 2027 से पहले भाजपा आरक्षण लागू नहीं करेगी तो आने वाले चुनाव में हमारा समाज भाजपा को वोट नहीं करेगा।
एक संविधान, एक कानून को बनाया हथियार
वीआईपी नेता मुकेश सहनी का मानना है कि जब देश में एक संविधान एक कानून की बात चल रही है तो फिर निषाद को लेकर देश में दो कानून क्यों? उनका कहना है कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे पड़ोसी राज्यों में निषाद समुदाय को अनुसूचित जाति (SC) का आरक्षण मिल रहा है। फिर बिहार और उत्तर प्रदेश में उन्हें इसका लाभ नहीं क्यों नहीं मिलता?
भरी हुंकार, निषाद को एससी का दर्जा दो
विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी ने पिछले दिनों रामलला के मंदिर में दर्शन करने के बाद यूपी चुनाव में शामिल होने का आगाज करते साफ कहा कि निषाद को एससी में शामिल किया जाए। मुकेश सहनी ने केंद्र और उत्तर प्रदेश की सरकारों को चेतावनी दी है कि अगर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले निषाद समाज को आरक्षण नहीं मिला, तो समाज चुनाव में सत्ताधारी दल का समर्थन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि आरक्षण की मांग को लेकर वे निषाद समुदाय को एकजुट करने के उद्देश्य से पूरे राज्य में ' निषाद आरक्षण संकल्प यात्रा ' निकालेंगे।